तुर्की के खिलाफ मैच में पराग्वे के प्रतिभाशाली खिलाड़ी का मुंह बंद करने के कारण मैदान से बाहर कर दिया गया, जिससे एक विवाद खड़ा हो गया है। यह घटना खेल में आम व्यवहार को लेकर बहस छेड़ती है। फीफा के नियमों में इस तरह के विरोध को अनुचित माना गया है, जिसके परिणामस्वरूप खिलाड़ी को निलंबित किया जा सकता है। आलोचकों का कहना है कि यह नियम अत्यधिक कठोर है और खिलाड़ियों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित करता है। इस मामले ने खेल जगत में कोड ऑफ़ कंडक्ट और खिलाड़ियों को मिलने वाले मार्गदर्शन पर भी सवाल उठाए हैं। यह घटना दर्शाती है कि खेल में विरोध के तरीकों को लेकर स्पष्टता की आवश्यकता है। इस निलंबन से पराग्वे की टीम को भी नुकसान हुआ है, क्योंकि एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी मैच से बाहर हो गया है।