प्रसिद्ध पत्रकार जेसुस एलोरजा ने फीफा पर गंभीर आरोप लगाए हैं, यह कहते हुए कि फुटबॉल अब जन-जन का खेल नहीं रहा। उनका कहना है कि फुटबॉल, जो कभी सामाजिक और लोकप्रिय जुड़ाव का प्रतीक था, अब एक लालची मशीनरी का शिकार हो गया है। एलोरजा के अनुसार, खेल अब जुनून से प्रेरित नहीं है, बल्कि व्यावसायिक हितों से संचालित है। उन्होंने इस स्थिति को ‘असंभव विश्व कप 2026’ के सपने के संदर्भ में व्यक्त किया है। यह टिप्पणी फुटबॉल के मूल मूल्यों के क्षरण और खेल के व्यवसायीकरण पर चिंता व्यक्त करती है। एलोरजा का यह लेख ‘TalCual’ नामक प्रकाशन में प्रकाशित हुआ है, जो इस मुद्दे पर आगे की बहस को जन्म दे सकता है।