कोलंबिया में एक दक्षिणपंथी नेता अबेलार्डो डे ला एस्प्रीला के चुनाव से देश में लोकतंत्र को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। एस्प्रीला, जो पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के समर्थक हैं, ने वामपंथियों को ‘चीरने’ और अपराधियों को ‘चूहों और तिलचट्टों’ की तरह मारने की कसम खाई है। 2012 में, उन्होंने एक पादरी के यौन शोषण के आरोपों को खारिज करते हुए पीड़िताओं को अपमानजनक ‘ट्रेपाडोरा’ कहा था, जिसका वीडियो हाल ही में राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान फिर से सामने आया और विवाद का विषय बना। हालांकि पादरी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा समीक्षाधीन मामले में बरी कर दिया गया था, लेकिन इस टिप्पणी ने प्रगतिशील मतदाताओं के बीच आक्रोश पैदा कर दिया। एस्प्रीला का चुनाव कोलंबिया की राजनीतिक दिशा और मानवाधिकारों के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े करता है। विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव देश में ध्रुवीकरण को और बढ़ा सकता है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि एस्प्रीला अपनी नीतियों को कैसे लागू करते हैं और वे देश के लोकतांत्रिक संस्थानों को कैसे प्रभावित करते हैं।