हाल के दिनों में 'केकड़ा मानसिकता' नामक एक व्यवहार देखा जा रहा है, जिसमें लोग अपने प्रियजनों की तरक्की से खुश होने के बजाय नकारात्मक प्रतिक्रिया देते हैं। अक्सर, जब कोई व्यक्ति जीवन में कोई बड़ी उपलब्धि हासिल करता है, जैसे कि स्नातक की उपाधि, नई नौकरी, या विवाह, तो उसे परिवार से अपेक्षित समर्थन और खुशी नहीं मिलती। कुछ लोग बधाई देने में हिचकिचाते हैं, कुछ उपलब्धियों को कम आंकते हैं, और कुछ ऐसे नकारात्मक टिप्पणियां करते हैं जो खुशी के पल को भी बोझिल बना देते हैं। यह मानसिकता ईर्ष्या, असुरक्षा, या सामाजिक मानदंडों के कारण उत्पन्न हो सकती है। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह का व्यवहार व्यक्ति के आत्मविश्वास और मनोबल को कम कर सकता है। 'केकड़ा मानसिकता' से निपटने के लिए, सकारात्मक संवाद और आपसी समझ को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण है।
