फ़ैसल के इस्तीफ़े के बाद राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे मंत्रिमंडल में बदलाव की प्रक्रिया तेज़ हो सकती है। उनका कहना है कि यह घटनाक्रम सत्तारूढ़ पीएपी (PAP) की उच्च मानकों और जवाबदेही की नीति को दर्शाता है। इस्तीफ़े का असर नेतृत्व के उत्तराधिकार पर भी पड़ सकता है, क्योंकि यह पार्टी के भीतर संभावित बदलावों का संकेत देता है। विश्लेषकों के अनुसार, पीएपी हमेशा से ही अपने सदस्यों से उच्च स्तर की नैतिकता और प्रदर्शन की अपेक्षा करती है। फ़ैसल का इस्तीफ़ा इस बात का प्रमाण है कि पार्टी किसी भी तरह की समझौता करने को तैयार नहीं है। यह कदम पार्टी की छवि को बनाए रखने और जनता का विश्वास जीतने के लिए उठाया गया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आगे मंत्रिमंडल में कौन शामिल होगा और कौन बाहर जाएगा।