विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों में आत्म-नियंत्रण की कमी के कारण वे आसानी से डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर आकर्षित हो जाते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए, सोशल मीडिया कंपनियों पर कानूनी कार्रवाई करने और सख्त उम्र सत्यापन प्रक्रिया लागू करने की मांग की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चे स्क्रीन से दूर रहने में असमर्थ होते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है। वे सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही तय करने और बच्चों को हानिकारक सामग्री से बचाने के लिए नियमों को कड़ा करने की वकालत कर रहे हैं। उम्र की सही पहचान सुनिश्चित करने से बच्चों को अनुपयुक्त सामग्री तक पहुंचने से रोका जा सकेगा। यह कदम बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों ने इस मुद्दे पर तत्काल ध्यान देने और ठोस उपाय करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
