विशेषज्ञों ने हंतावायरस के बड़े पैमाने पर फैलने की आशंका को खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में संचारित नहीं होता है। यह रोग मुख्य रूप से ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में रहने वाले कृंतकों (चूहों) द्वारा फैलता है। संक्रमण तब होता है जब लोग बंद जगहों पर मौजूद चूहों के मूत्र, मल या लार के कणों को सांस के जरिए अंदर लेते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमण का जोखिम केवल संक्रमित जानवरों के संपर्क में आने से है। इस स्पष्टीकरण का उद्देश्य जनता के बीच अनावश्यक डर को कम करना है। उचित स्वच्छता और सावधानी बरतकर इस जोखिम से बचा जा सकता है।