विश्व कप 2026 में 48 टीमों के प्रारूप को लेकर पहले संदेह जताया जा रहा था, जिसमें खेल के स्तर में गिरावट और असमानता की आशंका थी। हालांकि, प्रारंभिक दौर के मैचों में यह प्रारूप अप्रत्याशित परिणामों, अधिक गोलों और नई कहानियों को जन्म दे रहा है। यह बदलाव फुटबॉल के विकासशील देशों को भी वैश्विक मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर प्रदान कर रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि अधिक टीमों की भागीदारी से प्रतिस्पर्धा बढ़ी है और खेल अधिक रोमांचक हो गया है। इस प्रारूप ने विश्व कप को अधिक समावेशी और आकर्षक बनाने में मदद की है। शुरुआती नतीजों को देखते हुए, फीफा का यह जोखिम सफल होता दिख रहा है। यह प्रारूप विश्व कप के भविष्य के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
