यूरोप इस समय भीषण सूखे से जूझ रहा है, जिसके कारण लाखों लोगों को पानी की आपूर्ति में अभूतपूर्व कटौती का सामना करना पड़ रहा है। लगातार बारिश की कमी के कारण नदियों का जलस्तर घट गया है, जिससे व्यापार और ऊर्जा उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। मक्का, चावल, गेहूं और सोयाबीन जैसी प्रमुख फसलों को भारी नुकसान हुआ है, जिससे खाद्य सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है। यह सूखा ऐतिहासिक स्तर का है और इसने कई देशों में जल उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन इस स्थिति के लिए जिम्मेदार है। इस संकट ने यूरोपीय अर्थव्यवस्था को भी धीमा कर दिया है, जिससे आर्थिक मंदी की आशंका बढ़ गई है। स्थिति को सामान्य करने के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है।