यूरोपीय संघ की कूटनीतिक निष्क्रियता को अंतर्राष्ट्रीय कानून की रक्षा में विफलता के रूप में देखा जा रहा है। ईरान के परमाणु मुद्दे ने एक बार फिर वैश्विक एजेंडे पर प्रमुखता हासिल कर ली है। विश्लेषकों का मानना है कि यूरोप एक महत्वपूर्ण वैश्विक अभिनेता के रूप में अपनी भूमिका निभाने में चूक गया है। इस स्थिति से अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में शक्ति संतुलन प्रभावित हो सकता है। ईरान परमाणु समझौते पर वार्ता फिर से शुरू करने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है। यूरोपीय संघ से अपेक्षा की जा रही है कि वह इस मामले में सक्रिय भूमिका निभाए और कूटनीति के माध्यम से समाधान खोजने का प्रयास करे। यह निष्क्रियता यूरोपीय संघ की विदेश नीति की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े करती है।