स्ट्रासबर्ग में यूरोपीय संसद में हाल ही में हुई घटनाओं ने चिंता पैदा कर दी है। संसद सदस्यों द्वारा “उन्हें वापस भेजो!” जैसे नारे लगाए गए, जो सामूहिक उत्साह और नफ़रत से भरे भाषणों का प्रदर्शन था। लेखिका क्रिस्टीना लिंडक्विस्ट का कहना है कि इस तरह की घटनाएं फ़ासीवाद की राजनीति का हिस्सा हैं। उनका मानना है कि इस तरह के प्रदर्शनों के बाद क्या हो सकता है, यह इतिहास से जाना जा सकता है। लिंडक्विस्ट ने इस माहौल को भयावह बताया है और आगाह किया है कि इस तरह की नफ़रत भरी राजनीति के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। यह घटना यूरोपीय संसद में बढ़ते राजनीतिक ध्रुवीकरण और चरमपंथी विचारधाराओं के प्रसार को दर्शाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं से लोकतांत्रिक मूल्यों को खतरा हो सकता है।
