वर्तमान अशांत समय में एक पुस्तक ध्यान देने योग्य है, जिसका शीर्षक है ‘पुजारियों का विश्वासघात’। यह पुस्तक उन उथल-पुथल से प्रेरित होकर लिखी गई थी। लेखक वर्तमान यूरोपीय संकट और अभिजात वर्ग के विश्वासघात के बारे में अपने विचारों को प्रस्तुत करते हैं। यह कार्य यूरोप में व्याप्त नैतिक और राजनीतिक संकट को उजागर करता है। पुस्तक में, लेखक उन बौद्धिक लोगों की आलोचना करते हैं जिन्होंने कथित तौर पर जनता के प्रति अपना कर्तव्य निभाने में विफल रहे हैं। यह संकट की स्थितियों में नेतृत्व और जिम्मेदारी के मुद्दों पर विचार करने के लिए एक आह्वान है। यह पाठकों को जटिल सामाजिक और राजनीतिक वास्तविकता का विश्लेषण करने के लिए प्रोत्साहित करता है।