मिस्र के एक वरिष्ठ पत्रकार महमूद सुल्तान का मानना है कि यूरोप में मस्जिदों और उनके मीनारों की बढ़ती संख्या को लेकर कुछ हलकों की बेचैनी धार्मिक कारणों से अधिक, अन्य कारणों से उत्पन्न होती है। वे बताते हैं कि यह बेचैनी अनिवार्य रूप से इस्लाम से दुश्मनी नहीं है, बल्कि यूरोपीय समाजों में सांस्कृतिक और पहचान संबंधी चिंताओं का परिणाम है। यह चिंता मस्जिदों के दृश्यमान प्रतीक, विशेष रूप से मीनारों से जुड़ी है, जिन्हें यूरोपीय शहर के क्षितिज में एक नए तत्व के रूप में देखा जाता है। सुल्तान का तर्क है कि यह मुद्दा यूरोपीय पहचान और बहुसंस्कृतिवाद के साथ एक व्यापक बहस का हिस्सा है। यूरोपीय समाज विविधता को स्वीकार करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। मस्जिदों की उपस्थिति इस बहस को और तेज कर देती है, विशेषकर जब वे शहरों के केंद्र में प्रमुखता से बनाई जाती हैं। सुल्तान ने इस मुद्दे पर अधिक गहन विश्लेषण की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

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