यूरोप दुनिया के बाकी हिस्सों की तुलना में दोगुनी तेज़ी से गर्म हो रहा है। इसका मुख्य कारण वायु परिसंचरण में बदलाव, आर्कटिक की बर्फ का पिघलना और बर्फ की कमी है। हैरानी की बात है कि हवा की शुद्धता भी इसमें योगदान कर रही है, जिसके घातक परिणाम हो सकते हैं। वैज्ञानिक इस असामान्य तापमान वृद्धि के पीछे के जटिल कारकों का अध्ययन कर रहे हैं। इस स्थिति से यूरोप में चरम मौसम की घटनाओं और पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है। यह यूरोप के भविष्य के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है।