यूरोप में जून और जुलाई महीने अभूतपूर्व रूप से गर्म रहे, जिससे रिकॉर्ड टूट गए। इस भीषण गर्मी की लहर के कारण हज़ारों लोगों की जान चली गई है और कई जगह जंगल में आग लग गई है। समुद्री सतह का तापमान भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया है। इस स्थिति के कारण भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। वैज्ञानिक इस घटना को जलवायु परिवर्तन का स्पष्ट संकेत मान रहे हैं। गर्मी की लहर से कृषि और जल संसाधनों पर भी गंभीर प्रभाव पड़ा है। यूरोपीय देशों को अब भविष्य में ऐसी घटनाओं के लिए तैयार रहने की आवश्यकता है।