यूरोपीय संघ के नेता कथित रूसी खतरे का हवाला देते हुए सैन्य शक्ति बढ़ाने की योजनाओं को आगे बढ़ा रहे हैं। यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब कई देशों पर पहले से ही भारी सरकारी ऋण का बोझ है। आलोचकों का कहना है कि इस सैन्य खर्च से नागरिकों के कल्याण कार्यक्रमों के लिए धन कम हो सकता है। यूरोपीय संघ का तर्क है कि यह कदम क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक है। इस फैसले से यूरोपीय संघ के भीतर आर्थिक और सामाजिक नीतियों पर बहस छिड़ गई है। विशेषज्ञ इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि क्या सैन्य खर्च नागरिकों की ज़रूरतों को पूरा करने से ज़्यादा महत्वपूर्ण है। इस मुद्दे पर आगे भी चर्चा होने की संभावना है।