यूरोपीय संघ (ईयू) ने मंगलवार को ब्रुसेल्स में अफगान तालिबान के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ पहली बैठक की, जिसके बाद मानवाधिकार संगठनों ने इसकी कड़ी आलोचना की है। इन संगठनों का कहना है कि इस बैठक से तालिबान को वैधता मिल रही है। ईयू ने हालांकि इस कदम का बचाव करते हुए कहा है कि इसका उद्देश्य उन शरणार्थियों की वापसी प्रक्रिया को सुगम बनाना है जिनके आवेदन खारिज कर दिए गए हैं। यह बैठक तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद पहली बार हुई है। यूरोपीय संघ का जोर है कि यह संवाद मानवीय सहायता और अफगानिस्तान में स्थिति को लेकर चर्चा के लिए आवश्यक है। बैठक में मानवाधिकारों के मुद्दे पर भी बात हुई, लेकिन ईयू ने स्पष्ट किया कि यह तालिबान को मान्यता देने का संकेत नहीं है। यह कदम अफगानिस्तान में फंसे लोगों की सहायता करने और क्षेत्र में स्थिरता लाने के प्रयासों का हिस्सा बताया जा रहा है।
