मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर नुनो पाल्मा का तर्क है कि यूरोपीय संघ द्वारा गरीब क्षेत्रों के विकास के लिए आवंटित निधि वास्तव में गरीबी को बढ़ावा देने वाला एक जाल है। उनका मानना है कि इन निधियों के समाप्त होने से इन क्षेत्रों को दीर्घकालिक रूप से लाभ हो सकता है। पाल्मा के अनुसार, ये निधि क्षेत्रो को आत्मनिर्भर बनने से रोकती हैं और निर्भरता की संस्कृति को बढ़ावा देती हैं। उनका शोध दर्शाता है कि इन निधियों का प्रभाव सीमित है और अक्सर भ्रष्टाचार और अक्षमता के कारण वांछित परिणाम नहीं मिल पाते। निधि समाप्त करने से स्थानीय सरकारों और व्यवसायों को नवाचार और आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरित किया जा सकता है। पाल्मा का प्रस्ताव यूरोपीय संघ की विकास नीतियों पर एक महत्वपूर्ण बहस को जन्म दे सकता है। यह विचार पारंपरिक विकास सहायता मॉडल की प्रभावशीलता पर सवाल उठाता है।