यूरोपीय संघ ने सदस्य देशों को ‘वापसी केंद्र’ स्थापित करने की अनुमति दे दी है। इस कदम का उद्देश्य शरण चाहने वालों की संख्या को नियंत्रित करना और प्रवासन प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना है। इन केंद्रों के माध्यम से, यूरोपीय संघ सदस्य देश शरण चाहने वालों को तीसरे देशों में भेजने की संभावना तलाश सकते हैं। यह नीति शरणार्थियों के अधिकारों और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के अनुपालन से जुड़े कई सवाल खड़े करती है। आलोचकों का तर्क है कि यह कदम शरण चाहने वालों को उनके कानूनी अधिकारों से वंचित कर सकता है। यूरोपीय संघ का कहना है कि यह नीति कानूनी ढांचे के भीतर काम करेगी और मानवाधिकारों का सम्मान करेगी। इस नई नीति के परिणामस्वरूप, शरण चाहने वालों की स्थिति और यूरोपीय संघ के प्रवासन नीति में महत्वपूर्ण बदलाव आने की संभावना है।