यूरोपीय संघ और दक्षिण कोरिया ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उत्तर कोरिया को कभी भी परमाणु शक्ति के रूप में मान्यता नहीं दी जाएगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस सप्ताह प्योंगयांग की अपनी यात्रा के दौरान कोरियाई प्रायद्वीप से परमाणु हथियारों को हटाने के विषय पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की। विशेषज्ञों का मानना है कि शी जिनपिंग का यह मौन रुख उत्तर कोरिया को परमाणु हथियार विकसित करने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है। यूरोपीय संघ और दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया से परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से त्यागने और अंतर्राष्ट्रीय समझौतों का पालन करने का आग्रह किया है। दोनों देशों ने इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। इस घोषणा से कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव बढ़ने की आशंका है, क्योंकि उत्तर कोरिया अपने परमाणु कार्यक्रम को जारी रखने पर अड़ा हुआ है। यह स्थिति राजनयिक प्रयासों को और जटिल बना सकती है।