एंटीफ़्रीज़, जिसमें एथिलीन ग्लाइकॉल होता है, एक गंभीर विष है। मानव शरीर एथिलीन ग्लाइकॉल को इथेनॉल की तुलना में धीरे-धीरे संसाधित करता है। इस कारण, इथेनॉल देकर मरीज़ के शरीर को एथिलीन ग्लाइकॉल पर ध्यान केंद्रित करने से रोका जा सकता है। यह रणनीति, जहां मरीज़ को इथेनॉल पिलाया जाता है, एंटीफ़्रीज़ विषाक्तता के इलाज का एक प्रभावी तरीका हो सकता है। लिवर एथिलीन ग्लाइकॉल की बजाय इथेनॉल को आसानी से तोड़ पाता है, जिससे शरीर को विष से निपटने का समय मिल जाता है। यह उपचार, तत्काल चिकित्सा सहायता के साथ, मरीज़ की जान बचाने में मददगार साबित हो सकता है। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह केवल प्रशिक्षित चिकित्सा पेशेवरों द्वारा ही किया जाना चाहिए।