एस्टोनिया के टीइट हेनोस्ते का मानना है कि मनुष्य अभी भी व्यर्थता, ईर्ष्या, प्रसिद्धि, सुविधा, धन और शक्ति से प्रेरित हैं। उन्होंने ‘सिर्प’ पत्रिका में लिखा है कि इन मानवीय दुर्गुणों को पूरी तरह से समाप्त करना असंभव है। हेनोस्ते का तर्क है कि ये भावनाएं मानव स्वभाव का अभिन्न अंग हैं और इन्हें मिटाना संभव नहीं है। यह टिप्पणी समाज में प्रचलित मूल्यों और प्रेरणाओं पर एक निराशावादी दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। उनका विश्लेषण बताता है कि ये मूलभूत इच्छाएं, भले ही नकारात्मक हों, मानवीय व्यवहार को आकार देती रहेंगी। यह लेख एस्टोनियाई समाज में मूल्यों के बारे में एक चिंतन है, जो सार्वभौमिक रूप से लागू हो सकता है। हेनोस्ते का निष्कर्ष इस बात पर जोर देता है कि इन मानवीय कमजोरियों को स्वीकार करना और समझना महत्वपूर्ण है।

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