रविवार को सोवियत संघ और नाजी जर्मनी के बीच हुए मोलोटोव-रिबेंट्रोप समझौते की 87वीं वर्षगांठ मनाई गई। यह समझौता एस्टोनिया पर पचास वर्षों से अधिक समय तक चले सोवियत कब्जे का मार्ग प्रशस्त करने वाला साबित हुआ। एस्टोनिया में इस दुखद घटना की याद में विभिन्न शोक सभाएँ और स्मारक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस समझौते ने न केवल एस्टोनिया की स्वतंत्रता को छीन लिया, बल्कि अनगिनत लोगों के जीवन को भी प्रभावित किया। यह घटना एस्टोनिया के इतिहास का एक गहरा घाव है, जिसे आज भी याद किया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस समझौते की वर्षगांठ, हमें इतिहास से सबक लेने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की प्रेरणा देती है। एस्टोनियावासी अपने देश की स्वतंत्रता और संप्रभुता को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।