प्रसिद्ध हंगेरियन लेखक एस्टरहाज़ी के साथ हुई वार्ताओं पर आधारित एक नई पुस्तक प्रकाशित हुई है। यह पुस्तक उनकी पिछली रचनाओं से भिन्न है, क्योंकि इसमें एस्टरहाज़ी साहित्य के अलावा अन्य विषयों पर भी बात करते हुए प्रतीत होते हैं। हालांकि, एक आलोचक का तर्क है कि एस्टरहाज़ी किसी भी विषय पर बात करें, उनकी बातें अपने आप में साहित्य का हिस्सा बन जाती हैं। यह पुस्तक एस्टरहाज़ी के विचारों और व्यक्तित्व की एक अनूठी झलक प्रस्तुत करती है। इसमें उनके हाव-भाव और आवाज को महसूस किया जा सकता है, जो पाठकों को उनके करीब ले जाती है। यह पुस्तक एस्टरहाज़ी के प्रशंसकों और साहित्य प्रेमियों के लिए एक महत्वपूर्ण योगदान है। यह उनकी रचनात्मक दुनिया को समझने का एक नया अवसर प्रदान करती है।
