इस्तांबुल से प्राप्त खबरों के अनुसार, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तय्यिप एर्दोगान विपक्षी दलों पर अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं। वर्षों से, उन्होंने विपक्ष को दबाने की नीति अपनाई है, लेकिन अब वे स्वयं अपने पसंदीदा उम्मीदवारों को चुनने की तैयारी कर रहे हैं। यह कदम रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की कार्यशैली से मिलता-जुलता है, जहाँ सत्ता पर व्यक्तिगत नियंत्रण स्थापित किया गया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह तुर्की में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के लिए एक गंभीर चुनौती है। इस बदलाव से आगामी चुनावों और राजनीतिक परिदृश्य पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है। एर्दोगान पर पहले से ही सत्तावादी प्रवृत्तियों का आरोप लगाया जाता रहा है, और यह कदम उनकी स्थिति को और मजबूत कर सकता है। इस स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता व्यक्त की जा रही है।
