तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तय्यिप एर्दोग़ान ने हाल ही में घोषणा की है कि उन्होंने ‘राष्ट्रीय दृष्टिकोण’ (Millî Görüş) की विचारधारा को त्याग दिया है। यह विचारधारा, जिसका उन्होंने पहले समर्थन किया था, इस्लामी मूल्यों पर आधारित एक रूढ़िवादी राजनीतिक दर्शन है। एर्दोग़ान के इस बयान ने तुर्की की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान उनकी पार्टी, AKP (Justice and Development Party) की नीतियों में संभावित बदलाव का संकेत दे सकता है। यह घोषणा तुर्की में राजनीतिक विश्लेषकों और आम जनता के बीच बहस और अटकलों को जन्म दे रही है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह परिवर्तन तुर्की की घरेलू और विदेश नीति को कैसे प्रभावित करेगा। इस बदलाव से तुर्की के अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी असर पड़ सकता है।