अगस्त में ऊर्जा की थोक कीमतों में 21% की वृद्धि के बावजूद, सितंबर में खुदरा बिजली की दरों में अपेक्षाकृत कम वृद्धि हुई है। प्रमुख निजी ऊर्जा प्रदाताओं ने दरों में लगभग कोई बदलाव नहीं किया है। इसका अर्थ है कि कंपनियों ने थोक बाजार में मूल्य वृद्धि के प्रभाव को अवशोषित कर लिया है। यह उपभोक्ताओं के लिए अच्छी खबर है, क्योंकि उन्हें भारी मूल्य वृद्धि का सामना नहीं करना पड़ा। विशेषज्ञ इस स्थिति को अस्थायी मान रहे हैं और भविष्य में दरों में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं करते। सरकार ऊर्जा बाजार की स्थिति पर कड़ी निगरानी रख रही है और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए कदम उठाने को तैयार है। यह स्थिरता ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण विकास है।