आर्थिक एवं सामाजिक अनुसंधान संस्थान (ESRI) का अनुमान है कि अगले वर्ष तक तेल की कीमतें युद्ध से पहले के स्तर से काफ़ी अधिक बनी रहेंगी। इस वृद्धि का असर जल्द ही खाद्य जैसे अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ने की संभावना है। ESRI के अनुसार, ऊर्जा की उच्च कीमतें व्यापक आर्थिक प्रभाव डाल सकती हैं। यह स्थिति वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति को और बढ़ा सकती है। संस्थान का कहना है कि आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और भू-राजनीतिक तनाव तेल की कीमतों को ऊंचा रखने में योगदान कर रहे हैं। उपभोक्ताओं को ईंधन और अन्य ऊर्जा उत्पादों की कीमतों में वृद्धि का सामना करना पड़ सकता है। व्यवसायों को भी उत्पादन लागत बढ़ने से चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।