चीन ने वैश्विक मामलों में उभरती अर्थव्यवस्थाओं के प्रतिनिधित्व को मजबूत करने का आह्वान किया है। यह आह्वान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक दक्षिण के देशों का मानना है कि अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर उनकी आवाज़ कम सुनी जाती है। चीन का यह रुख विकासशील देशों को वैश्विक नीति निर्धारण में अधिक प्रभावी भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास माना जा रहा है। बीजिंग का तर्क है कि वर्तमान वैश्विक शासन प्रणाली, जो शीत युद्ध के बाद बनी थी, अब बदलती दुनिया की वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करती है। चीन ने विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की वकालत की है, ताकि विकासशील देशों को स्थायी सदस्यता मिल सके। इस मांग का उद्देश्य वैश्विक शक्ति संतुलन को अधिक न्यायसंगत बनाना है। विश्लेषकों का कहना है कि चीन का यह कदम वैश्विक प्रभाव के लिए पश्चिमी देशों के साथ प्रतिस्पर्धा का भी हिस्सा है।