चुनाव के दौरान सार्वजनिक बहसों में तीखी बयानबाजी और टकराव का स्तर बढ़ गया है। मानवाधिकार संगठन ने गलत सूचना, भ्रामक प्रचार और संस्थाओं की विश्वसनीयता पर उठते सवालों को लेकर चिंता व्यक्त की है। यह स्थिति चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है और सामाजिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा दे सकती है। संगठन ने राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों से संयम बरतने और तथ्यों पर आधारित जानकारी साझा करने का आग्रह किया है। स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए संस्थानों का सम्मान करना आवश्यक है। इस मामले में तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया सुचारू रूप से चल सके। संगठन की रिपोर्ट में चुनावी माहौल को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की गई है।