गत स्थानीय चुनावों के दौरान, पूर्व केंद्रीय चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष नो ते-आक को मतदान की समाप्ति से मात्र 40 मिनट पहले मतपत्रों की कमी के बारे में सूचित किया गया था। यह जानकारी सामने आने के बाद चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, मतपत्रों की कमी की समस्या मतदान के दौरान ही उत्पन्न हो गई थी, लेकिन इसकी सूचना समय पर अध्यक्ष को नहीं दी गई। इस देरी के कारण मतदान केंद्रों पर मतदाताओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। इस मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और चुनाव प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाया जा सके। विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर सरकार की आलोचना की है, और निष्पक्ष जांच की मांग की है। यह घटना चुनाव आयोग की तैयारियों और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।
