पूर्व गवर्नर एल-रुफ़ाई के खिलाफ अवैध रूप से फोन टैपिंग के मामले में, राज्य सुरक्षा सेवा (डीएसएस) ने अपनी दलीलें पूरी कर ली हैं। अब एल-रुफ़ाई ‘नो-केस सबमिशन’ दाखिल करेंगे, जिसका अर्थ है कि वे तर्क देंगे कि अभियोजन पक्ष ने उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत पेश नहीं किए हैं। इस मामले में एल-रुफ़ाई पर दूसरों की बातचीत को बिना अनुमति के सुनने का आरोप है। डीएसएस ने मामले में अपनी अंतिम दलीलें अदालत में प्रस्तुत कर दी हैं। एल-रुफ़ाई की कानूनी टीम का मानना है कि प्रस्तुत सबूत पर्याप्त नहीं हैं और अदालत को उनके पक्ष में फैसला देना चाहिए। अब अदालत यह तय करेगी कि क्या एल-रुफ़ाई को अपना बचाव करने की आवश्यकता है या नहीं। यह मामला नाइजीरियाई राजनीति में काफ़ी चर्चा का विषय बना हुआ है।
