पेरू और इक्वाडोर के आदिवासी समुदायों द्वारा समुद्र के तापमान में वृद्धि को स्नेहपूर्वक ‘एल नीनो’ या ‘खोक़ाबাবু’ कहा जाता है। यह घटना जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वैश्विक मौसम पैटर्न को प्रभावित कर सकती है। एल नीनो की स्थिति प्रशांत महासागर में समुद्री सतह के तापमान में असामान्य वृद्धि का संकेत देती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस वर्ष एल नीनो की प्रबल संभावना है, जिससे दुनिया भर में तापमान में वृद्धि हो सकती है। इससे वर्षा के पैटर्न में बदलाव और चरम मौसम की घटनाओं जैसे बाढ़ और सूखे का खतरा बढ़ सकता है। एल नीनो का कृषि, मत्स्य पालन और समग्र रूप से अर्थव्यवस्था पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।