वैज्ञानिक अनुमानों के अनुसार, २०२६ में फिर से एल नीनो की स्थिति उत्पन्न होने की संभावना है। एल नीनो एक मौसम संबंधी घटना है जो विषुववृत्त क्षेत्र में दबाव और वायु परिसंचरण के पैटर्न को बदल देती है। इस बदलाव के परिणामस्वरूप दुनियाभर में मौसम में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं। एल नीनो के दौरान, प्रशांत महासागर के पूर्वी हिस्से में समुद्री जल का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है। इससे वर्षा के पैटर्न में बदलाव होता है, जिससे कुछ क्षेत्रों में बाढ़ और सूखे जैसी स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं। वैज्ञानिक इस घटना पर बारीकी से निगरानी रख रहे हैं ताकि इसके संभावित प्रभावों को समझा जा सके। एल नीनो का प्रभाव विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्था और कृषि पर भी पड़ सकता है।