अल नीनो की स्थिति आधिकारिक रूप से लौट आई है, जिससे दुनिया भर में तापमान में वृद्धि होने की संभावना है। यह जलवायु पैटर्न प्रशांत महासागर में समुद्री सतह के तापमान में बदलाव के कारण उत्पन्न होता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अल नीनो के प्रभाव अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न होंगे, कुछ क्षेत्रों में अधिक गर्मी और सूखे का अनुभव होगा, जबकि अन्य में भारी बारिश और बाढ़ आ सकती है। इस वर्ष अल नीनो के कारण वैश्विक स्तर पर रिकॉर्ड तोड़ तापमान देखने को मिल सकता है। भारत में मानसून पर भी इसका असर पड़ सकता है, जिससे वर्षा की मात्रा और समय में बदलाव हो सकता है। अल नीनो के कारण कृषि, जल संसाधन और समग्र रूप से अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है। विशेषज्ञ स्थिति पर बारीकी से निगरानी रखने और इसके प्रभावों को कम करने के लिए तैयारी करने का आग्रह कर रहे हैं।