मिस्र में ‘नागरिक आंदोलन’ (Civil Movement) अपनी भविष्य की रणनीति पर विचार कर रहा है। यह तब हो रहा है जब सर्वोच्च न्यायालय (Court of Cassation) ने अहमद अल-बाकर की उस अपील को खारिज कर दी है, जिसमें उन्हें ‘आतंकवादी सूची’ से हटाने की मांग की गई थी। अल-बाकर को पहले ही इस सूची में शामिल किया जा चुका है और उनकी अपील खारिज होने से उनकी स्थिति और कमजोर हो गई है। यह निर्णय ‘नागरिक आंदोलन’ के भीतर चिंता पैदा कर रहा है, क्योंकि यह आंदोलन सरकार की नीतियों के विरोध में सक्रिय है। इस फैसले के बाद आंदोलन के भविष्य और रणनीति को लेकर बहस छिड़ गई है। ‘मादा मस्र’ (Mada Masr) के अनुसार, आंदोलन अपनी दिशा और प्रभावशीलता का पुनर्मूल्यांकन कर रहा है। यह मामला मिस्र में मानवाधिकार और राजनीतिक स्वतंत्रता पर बढ़ते दबाव को दर्शाता है।
