सरकार ने सुधारों की शुरुआत की है, लेकिन अर्थशास्त्रियों का कहना है कि कार्यान्वयन में देरी हुई है। अर्थव्यवस्था में अभी तक सार्थक सुधार के संकेत नहीं मिले हैं। वित्त मंत्री पिछले १०० दिनों में अर्थव्यवस्था को गति देने और निजी क्षेत्र के विश्वास को बहाल करने में विफल रहे हैं। सुधारों को लागू करने में आने वाली चुनौतियों के कारण वांछित परिणाम प्राप्त नहीं हो पाए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नीतिगत बाधाओं को दूर करने और निवेश के माहौल को बेहतर बनाने की आवश्यकता है। अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सरकार को त्वरित और प्रभावी कदम उठाने होंगे। निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए ठोस उपायों की भी आवश्यकता है।

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