50 वर्ष की एक कामकाजी महिला, जिन्हें शुरुआती चरण में स्तन कैंसर का पता चला था, अब उपचार के बाद मानसिक संघर्ष से जूझ रही हैं। उन्होंने कीमोथेरेपी और अन्य चिकित्सा प्रक्रियाओं को सफलतापूर्वक पूरा किया, लेकिन शारीरिक स्वास्थ्य के बावजूद वे गहरे अवसाद में हैं। महिला को हर दिन इस बात का डर सताता है कि कैंसर कहीं दोबारा वापस न आ जाए। यह स्थिति उनके दैनिक जीवन और मानसिक शांति को बुरी तरह प्रभावित कर रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, कैंसर सर्वाइवर्स में इस तरह का 'री-करेंस फियर' या पुनरावृत्ति का डर आम है। यह मामला दर्शाता है कि कैंसर के इलाज में केवल शारीरिक उपचार ही नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक सहायता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उचित परामर्श और मानसिक स्वास्थ्य देखभाल के जरिए इस डर को कम किया जा सकता है।