ट्यूनीशिया में संघों के संगठन से संबंधित कानून के संशोधित मसौदे की समीक्षा जारी है। इस बीच, सोशल मीडिया पर भी इस कानून को लेकर बहस तेज हो गई है। विशेष रूप से, 2011 के डिक्री-लॉ 88 पर विवाद केंद्रित है, जो संघों को नियंत्रित करने वाला कानूनी ढांचा है। कई हफ़्तों से सोशल मीडिया पर इस कानून के बारे में अनेक पोस्ट सामने आ रही हैं। यह मसौदा संघों की स्वतंत्रता और संचालन को प्रभावित कर सकता है, जिसके कारण नागरिक समाज संगठनों और कार्यकर्ताओं में चिंता है। प्रस्तावित संशोधनों के निहितार्थों पर बहस जारी है, और विभिन्न पक्ष अपने विचार व्यक्त कर रहे हैं। यह कानून ट्यूनीशियाई नागरिक समाज के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
