नीदरलैंड्स में अधिकांश डेटा सेंटर अपने पर्यावरणीय प्रभाव को सार्वजनिक नहीं करते हैं, जिससे पानी और बिजली की खपत छिपी रहती है। एक हालिया रिपोर्ट से पता चला है कि पारदर्शिता की कमी के कारण डेटा केंद्रों के वास्तविक पर्यावरणीय भार का आकलन करना मुश्किल है। यह स्थिति टिकाऊ प्रथाओं को अपनाने और ऊर्जा दक्षता में सुधार करने की दिशा में प्रगति को बाधित करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक जवाबदेही बढ़ाने के लिए डेटा केंद्रों द्वारा ऊर्जा और पानी के उपयोग का खुलासा अनिवार्य किया जाना चाहिए। इस पारदर्शिता से उपभोक्ताओं और नीति निर्माताओं को सूचित निर्णय लेने में मदद मिलेगी। डेटा सेंटर उद्योग के पर्यावरणीय पदचिह्न को कम करने के लिए अधिक विनियमन और निरीक्षण की आवश्यकता है। रिपोर्ट में यह भी उजागर किया गया है कि कुछ डेटा सेंटर नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करने के लिए कदम उठा रहे हैं, लेकिन यह प्रयास अभी तक व्यापक नहीं है।