डरबन, दक्षिण अफ्रीका में हाल के हफ्तों में ज़ेनोफोबिया से प्रेरित हिंसा के कारण मलावियन समुदाय को अपने घरों से भागने पर मजबूर होना पड़ा है। आठ वर्षीय मिलाको कुलिंजी इस हिंसा का एक प्रतीक बन गया है। फ़ोटोग्राफ़र टॉमी ट्रेंचर्ड की तस्वीरों में डरबन के शेरवुड इलाके में बने एक अस्थायी शिविर में शरण लेने वाले हज़ारों लोगों की स्थिति दिखाई गई है। देश भर में अफ्रीका विरोधी और प्रवासी विरोधी प्रदर्शनों और हिंसा में वृद्धि देखी गई है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि वे अब दक्षिण अफ्रीका में सुरक्षित महसूस नहीं करते हैं और अपने वतन लौटने की इच्छा रखते हैं। सरकार ने सोमवार को बताया कि उसने लगभग सात हज़ार मलावियन नागरिकों को वापस उनके देश भेज दिया है। यह घटना दक्षिण अफ्रीका में ज़ेनोफोबिया की गंभीर समस्या को उजागर करती है।
