2001 में डरबन में आयोजित संयुक्त राष्ट्र का नस्लवाद, नस्लीय भेदभाव, ज़ेनोफोबिया और संबंधित असहिष्णुता के ख़िलाफ़ तीसरा सम्मेलन विश्व स्तर पर लाखों लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण था। डरबन घोषणा और कार्य योजना नस्लवाद के ख़िलाफ़ वैश्विक लड़ाई के लिए आधारशिला बन गई। डरबन घोषणा की शुरुआत के 25 वर्ष बाद भी, नस्लवाद और ज़ेनोफोबिया आज भी दुनिया भर में मौजूद हैं। अब ज़रूरत इस बात की है कि राष्ट्र इस योजना का उपयोग करके स्पष्ट और ठोस कदम उठाएं। वादों को वास्तविकता में बदलने के लिए सदस्य देशों को ठोस कार्यवाही करनी चाहिए। डरबन सम्मेलन के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए देशों को एकजुट होकर काम करना होगा। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि डरबन की भावना जीवित रहे और नस्लवाद के विरुद्ध लड़ाई जारी रहे।