हाल के वर्षों में दुबई ने एक स्थिर और सुरक्षित स्थान के रूप में अपनी प्रतिष्ठा बनाई थी, जिससे निवेशकों और पर्यटकों की भारी भीड़ आकर्षित हुई। हालांकि, ईरान के हालिया हमलों ने दुबई के सेवा-आधारित व्यवसाय मॉडल को हिला दिया है। अब कुशल श्रमिकों का पलायन हो रहा है और सऊदी अरब तथा कतर में इनकी मांग बढ़ रही है। इन हमलों के कारण निवेशकों में अनिश्चितता का माहौल है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति से दुबई की आर्थिक वृद्धि प्रभावित हो सकती है। फारस की खाड़ी के सभी देशों पर आर्थिक संकट का दबाव है, लेकिन सऊदी अरब इस स्थिति का लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है। यह बदलाव क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में भी बदलाव ला सकता है।
