प्रेसली चंग ने सात साल की उम्र में प्राथमिक विद्यालय छोड़ दिया था, जिसके बाद उन्हें सामाजिक अलगाव और धमकाने का सामना करना पड़ा। उन्होंने CNA TODAY को बताया कि कैसे वह वापस स्कूल जाने के लिए संघर्ष करते रहे। इस दौरान कई शिक्षकों ने उनका साथ दिया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। प्रेसली अब एक प्रशिक्षु शिक्षक बनने का सपना देख रहे हैं, ताकि वह दूसरों की मदद कर सकें। उनकी यह यात्रा कठिनाइयों से भरी रही है, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उनका मानना है कि शिक्षा जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है, और वे दूसरों को भी यह अवसर देना चाहते हैं। प्रेसली की कहानी प्रेरणादायक है और दिखाती है कि मेहनत और लगन से कुछ भी हासिल किया जा सकता है।