रूस में ड्रोन हमलों के कारण ईंधन की आपूर्ति कम होने के चलते, सरकार ने पिछले शरद ऋतु से ही एक नियम में ढील दी है। इस नए नियम के तहत, पेट्रोल में यूरोपीय संघ द्वारा निर्धारित सल्फर की मात्रा से 15 गुना अधिक सल्फर की अनुमति दी गई है। इसका मतलब है कि रूस अब कम गुणवत्ता वाले यूरो-3 ईंधन की बिक्री कर सकता है। यह कदम देश में ईंधन की कमी को दूर करने के लिए उठाया गया है, क्योंकि लगातार हमलों से रिफाइनरियों का उत्पादन प्रभावित हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। ईंधन की राशनिंग अब पूरे रूस में फैल रही है, जिससे आम नागरिकों और उद्योगों दोनों को परेशानी हो रही है। यह स्थिति रूस की ऊर्जा नीति और आपूर्ति श्रृंखला पर ड्रोन हमलों के बढ़ते प्रभाव को दर्शाती है।
