पूर्वी यरूशलम निवासी ओर्टल ने अपने मुस्लिम साथी द्वारा वर्षों तक गंभीर हिंसा का सामना किया। इस दौरान, उसने अपने घर में मेज़ुज़ा के स्थान पर एक कील लगाई। उस कील ने उसे साहस दिया और एक नई ज़िंदगी शुरू करने का हौसला मिला। यह कील उसके लिए उम्मीद और बदलाव का प्रतीक बन गई। ओर्टल ने आखिरकार हिंसा से मुक्ति पाई और एक स्वतंत्र जीवन जीने का फैसला किया। यह घटना घरेलू हिंसा से जूझ रही महिलाओं के लिए प्रेरणादायक है। यह दर्शाता है कि मुश्किल परिस्थितियों में भी बदलाव संभव है।