तीन डॉक्टरों ने करों से बचने के लिए कंपनियों का एक जटिल जाल बनाया था। उनका उद्देश्य अपनी आय को वेतन के रूप में दर्शाने के बजाय कर-मुक्त लाभांश के रूप में प्राप्त करना था। न्यायालय ने इस व्यवस्था को अवैध घोषित कर दिया है, क्योंकि यह कर कानूनों का उल्लंघन करती है। डॉक्टरों ने कम वेतन लिया और मुनाफे को लाभांश के रूप में निकाला, जिससे कर दायित्व कम हो गया। अदालत ने माना कि यह व्यवस्था केवल करों से बचने के लिए की गई थी और इसका कोई वास्तविक व्यावसायिक उद्देश्य नहीं था। इस मामले ने कर नियोजन और कर चोरी के बीच की रेखा को उजागर किया है। न्यायालय के इस फैसले से कर चोरी करने वालों के लिए एक चेतावनी है।