पोप लियोन XIV से असंतुष्ट एक और समूह, ‘फिग्ली डेल सान्टिसिमो रेडेंटोर’, 25 जुलाई को पोप के आदेश के बिना एक बिशप की नियुक्ति करने की योजना बना रहा है। यह समूह पोप के अधिकार को चुनौती दे रहा है और धार्मिक समुदाय में विभाजन की स्थिति उत्पन्न कर सकता है। यह कदम रोमन कैथोलिक चर्च के भीतर आंतरिक तनाव को दर्शाता है। इस ‘अधिकारहीन बिशप’ की नियुक्ति से चर्च के भीतर और अधिक विवाद होने की संभावना है। विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम चर्च की एकता के लिए एक चुनौती पेश कर सकता है। इस कदम से पोप लियोन XIV के नेतृत्व पर भी सवाल उठ सकते हैं। यह समूह अपने धार्मिक विश्वासों को स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध प्रतीत होता है।