गृह मंत्रालय ने मोबाइल फोन, ईमेल और अन्य डिजिटल उपकरणों में मौजूद डेटा की जांच के लिए न्यायालय की मंजूरी अनिवार्य करने के प्रस्ताव का समर्थन किया है। वर्तमान में, कुछ मामलों में अधिकारियों को वारंट के बिना भी डिजिटल डेटा तक पहुंचने की अनुमति है। नए प्रस्ताव के अनुसार, किसी भी प्रकार की डिजिटल खोज से पहले अदालत से अनुमति लेना आवश्यक होगा। मंत्रालय का कहना है कि यह नागरिकों की गोपनीयता की रक्षा करने और अधिकारों के दुरुपयोग को रोकने में मदद करेगा। यह कदम डिजिटल युग में व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार जल्द ही इस प्रस्ताव को कानून में बदलने के लिए काम करेगी। इस बदलाव से कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर असर पड़ सकता है।