ध्रुव राठी का ‘नमस्ते दोस्त!’ सबसे छोटा, फिर भी सबसे शक्तिशाली राजनीतिक वाक्य है। यह वाक्य राजनीति में कितना प्रभाव डालेगा, इसका अंदाजा जल्द ही लगाया जा सकता है। राठी के इस नारे से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चिंतित हो सकते हैं। यह नारा पारंपरिक राजनीतिक संवादों से अलग है और युवाओं को आकर्षित कर सकता है। इस नारे के माध्यम से राठी एक दोस्ताना और समावेशी छवि प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नारा आगामी चुनावों में किस प्रकार की प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस नारे में राजनीतिक बदलाव लाने की क्षमता है।